Gajar Ke Fayde गाजर बहुत ही गुणकारी है स्वाथ्य के लिए है


Gajar Ke Fayde गाजर बहुत ही गुणकारी है स्वाथ्य के लिए है

गाजर  का  जूस :-

Gajar Ke Fayde गाजर बहुत ही गुणकारी है स्वाथ्य के लिए है (Carrots is very beneficial),  गाजर   में   जीवन   दायिनी   शक्ति है,   गाजर   में   दूध   के   समान   गुण   विद्यमान   हैं   और   गाजर का   रस   दूध   से   भी उत्तम   है,   गाजर   में   माता   के   दूध   के समान   खनिज   लवण   पाए   जाते   हैं।  इसके   उपयोग   से  हमारी सेहत   बहुत   बढ़िया   रह   सकती   है।   गाजर  का   उपयोग   इसका रस   निकाल   कर   या   सब्जी   बनाकर   किया   जा   सकता   है।
गाजर   का   जूस   नियमित   पीने   से   हमारी   आँखों   के   छोटे छोटे   रोगों   से   लेकर   मोतियाबिंद   जैसे   रोग   नहीं   होते।   गाजर के   नियमित   सेवन   से   ब्रैस्ट   कैंसर,   पेट   के   कैंसर   और फेफड़ों   के   कैंसर   से बचा   जा सकता है   और   अगर   ये   रोग हो जाए   तो   इसके   सेवन   से   बहुत   जल्दी   रिकवरी   होती   है। लीवर   पेट   आँतों   और   दांतों   मसुडो   के   रोगों   में   भी   बहुत लाभकारी   है ।

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पालक का जूस के फायदे(Spinach juice benefits)

पालक का जूस के फायदे(Spinach juice benefits)



पालक  का  जूस :-

पालक   विटामिन K,   विटामिन A (करोटेनॉइड्स के रूप में),   मैंगनीज,   मैग्नीशियम,   आयरन,   कैल्शियम,   एमिनो एसिड   तथा फोलिक  एसिड  फोलेट,   कॉपर,   विटामिन B2,    विटामिन B6, विटामिन E,   कैल्शियम,   पोटैशियम,   और   विटामिन C   का   अति उत्कृष्ट   स्त्रोत   है।   कच्चा   पालक   खाने   से   कड़वा   और   खारा ज़रूर   लगता   है,   परन्तु   ये   गुणकारी   होता   है।   गुणों   के मामले   में   पालक   का   शाक   सब  शाकों   से   बढ़  चढ़कर   है। इसका   रस   यदि   पीने   में   अच्छा   न  लगे   तो   इसके   रस   में आटा   गूंथकर   रोटी   बनाकर   खानी   चाहिए।   पालक   रक्त   में लाल   कण   बढ़ाता   है।   कब्ज   दूर   करता   है।   पालक,   दाल व् अन्य   सब्जियों   के   साथ   खाएं।


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गेंहू के जवारों और गिलोय का मिक्स जूस(Mix the juice of wheat Jwaron and Giloy)

गेंहू के जवारों और गिलोय का मिक्स जूस

गेंहू के जवारों और गिलोय का मिक्स जूस(Mix the juice of wheat Jwaron and Giloy)

अगर  आपको   कोई   ऐसा   रोग   हो   गया   हो   जो   असाध्य   हो या   आपको   लगता   हो   के   ये   आपकी  जान  लेकर  ही  जायेगा तो  बिना  विलम्ब  किये  रोगी  को  ये  जूस  पिलाना  शुरू   करना चाहिए,   ये  शरीर  में  जाते  ही  शरीर  से  विजातीय  पदार्थ निकालकर  शारीर  में  अमृत   का  संचार  करता  है,  कैंसर,  हृदय  की ब्लॉकेज,  किडनी के रोगों, लीवर, ब्लड शुगर जैसे अनेक रोगों के लिए ये बेहतरीन  है. इस   जूस   के   बारे  के  गुणों  के  बारे  में  जितना लिखा  जाए  उतना  ही  कम   है.  गेंहू  के  जवारो  को  आयुर्वेद  में ग्रीन  ब्लड  और  पृथ्वी  की  संजीवनी  के  नाम  से  सम्भोधित  किया जाता है और गिलोय को अमृता के नाम से जाना जाता है, इन दोनों को मिक्स कर के बनाया गया जूस अपने आप में अमृत लिए रहता है
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पेट से छाती तक की बीमारियां (Diseases of Stomack to Chest)

पेट से छाती तक की बीमारियां (Diseases of Stomack to Chest)

पेट से छाती तक की बीमारियां (Diseases of Stomack to Chest)


दोस्तों ये घरेलू व आयुर्वेदिक इलाज मैंने आचार्य बालकृष्ण जी और दाती महाराज जी की फेसबुक पोस्ट से एकत्रित किये है . उम्मीद है इनसे आपको लाभ मिलेगा .



अल्सर :- कच्चे    केले    की    सब्जी    खाने   से   अल्सर   में   शीघ्र   लाभ   होता   है .
पेट से छाती तक की बीमारियां (Diseases of Stomack to Chest)



पेट के अल्सर का घरेलू उपचार:- एक   चम्मच   आवले   के   रस में   एक चम्मच   सहद मिलाकर   प्रतिदिन   दो बार पीने से   पेट का   अल्सर ठीक   हो जाता है .



अपच ( भोजन का न पचना ):- अपच   में   छांछ   एक   सर्बोत्तम   औसधि है   छांछ   आंतो में     स्वास्थ्यबर्धक कीटाणुओं   की   बृद्धि करती है.   छांछ   में   सेंधा   नमक   भुना   हुवा   जीरा   तथा   पिसी     हुयी   काली   मिर्च   मिलाकर   सेवन   करने से   अजीर्ण (भूख न लगना ) दूर हो   जाता है .


पेट में गैस बनना या पेट फूलना :- पेट   में   गैस   बनने या   पेट फूलने   पर थोड़ी   सी   हींग   को   गरम   पानी में घोलकर    लेप   बना लें   तथा   इसमे   रुई   भिगोकर   नाभि   पर   रख   दें. ऐसा   करने से   पेट   फूलने में शीघ्र ही राहत मिलती है .




पेट की गैस की अचूक औसधि :- दो छोटे चम्मच नीम्बू के रस तथा थोड़े से सेंधा नमक को २०० मिलीलीटर गुनगुने पानी में मिलकर धीरे धीरे पीने से पेट की गैस में लाभ होता है .


पाचन शक्ति बढ़ाना :- पपीता   पाचन   शक्ति   को   बढ़ता है   और   खून   की कमी   को दूर करता है . अतः जिन्हे खून की   कमी   होती   है उन्हें   पपीता   जरूर   खाना   चाहिए .



पेट दर्द :-    अनार   के  रस   से   लगभग   हर   प्रकार के   उदर रोगों   का उपचार   हो जाता है .   इसके नियमपूर्वक सेवन से भोजन – रस   का   निर्माण   प्रयाप्त   मात्रा में   होता है   जिससे   मेदा व यकृत   आदि की   दुर्बलता, संग्रहणी, दस्त   तथा   हर   प्रकार के   पेट दर्द   की   शिकायत   दूर होती है.



पेट दर्द का घरेलू उपचार:- अदरक   तथा   पुदीना   का   रस   एक   एक   चम्मच   की   मात्रा   में   ले   तथा   इसमे   सेंधा   नमक   मिला   लें .   इसे   पीने   से   पेट दर्द में तुरंत   लाभ होता है .


पेट दर्द का अनुभूत प्रयोग:-   लगभग   एक   ग्राम   पीसी   हुयी   सौंठ , एक चुटकी   हींग   तथा   थोड़ा   सा   सेंधा नमक   मिलाकर   गुनगुने   पानी   के   साथ   फंकी   लेने   से   पेट   दर्द में   लाभ होता है .


अम्ल पित (Acidity):- धनिया,  जीरा,   मिश्री   बराबर   मात्रा में   लेकर   पीस   लें .   इस   चूर्ण   को    प्रतिदिन २ – २ चम्मच   की   मात्रा में   सुबह   शाम   भोजन   के   बाद   सादे   पानी से   सेवन करें . कुछ   दिन   इसका   प्रयोग लगातार  करने   से   अम्लपित्त   का   रोग   दूर हो जाता है .


अल्सर – बिभिन्न औसधियों द्वारा अल्सर का उपाय :- १. पान   के   हरे   पत्ते   का   आधा   चम्मच   रस    प्रतिदिन पीने   से   पेट   के   घाव   व   दर्द   में   लाभ   होता है .
२. एक   चम्मच   आंवले   के   रस   में   एक   चम्मच   सहद   मिलाकर   प्रतिदिन   पीने   से   अल्सर   ठीक   हो जाता है . ३. अल्सर   के   रोगी   को   अनार   के   रस   तथा   आवला   मुरब्बा   सेवन   करने   से   लाभ होता है . ४. अल्सर में   दूध , पका   केला , चीकू,   शरीफा   तथा   सेब का   सेवन   करना   चाहिए..
पेट से छाती तक की बीमारियां (Diseases of Stomack to Chest)



अस्थमा :- हल्दी   को   पीसकर   चूर्ण   बना लें   तथा इस   चूर्ण   को सूखी   कढ़ाई में    भून कर   ठंडा   होने   पर शीशी में भरकर   रख   लें यह   चूर्ण   एक   छोटी   चम्मच की   मात्रा में   प्रतिदिन   गरम पानी   या   गर्म दूध के   साथ    सेवन करने से   अस्थमा   में बहुत   लाभ   होता है


श्वास (दमा) रोग हेतु अनुभूत प्रयोग :-
आधे चम्मच अदरक के रस में एक चमच शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम चाटने से सभी प्रकार के स्वाश रोग ,खांसी तथा जुकाम आदि ठीक होते है .



आंतो की सूजन दूर करने में उपयोगी दही:- आंतो की सूजन दूर करने में दही अत्यंत लाभ कारक है. इस रोग में भूक लगने पर रोटी से अधिक दही का सेवन करने से जल्दी ही आंतो की सूजन दूर हो जाती है ..


दस्तों में लाभ कारी ईसबगोल:- ईसबगोल को दही के साथ सेवन करने से आंवयुक्त दस्त और खुनी दस्त के रोग में लाभ मिलता है.


दिल की घबराहट:- 50 ग्राम सेब के जूस में दस ग्राम शुद्ध शहद को मिलाकर सेवन करने से दिल की घबराहट से तत्काल राहत मिलती है .


पाचन शक्ति बढ़ाने हेतु प्रयोग:- चुटकी   भर   काली मिर्च   के   चूर्ण में   एक चम्मच   शहद   मिलाकर   दिन   में   दो बार चाटने   से   पाचन   शक्ति   बढ़ती   है   तथा   भूख   लगती है .



गुर्दा (Kidney) की सफाई में उपयोगी हरा धनिया:-   लगभग   50 ग्राम   हरा धनिया   अच्छी   तरह   धोकर   बारीक काट   लें   और   इसे   एक गिलास   पानी   में   डालकर   10 मिनट   तक उबालें .   इसे   ठंडा   होने   पर   छान   कर पी लें . प्रतिदिन ऐसा करने से गुर्दों की सफाई हो जाती है तथा गन्दगी मूत्र के साथ बाहर निकल जाती है . यह प्रयोग किसी भी समय कर सकते है .


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पत्ता गोभी के फायदे स्वाथ्य के लिए बहुत ही गुणकारी है




पत्तागोभी  का  जूस :-

पत्ता गोभी के फायदे स्वाथ्य के लिए बहुत ही गुणकारी है पत्तागोभी   देखने   में   जितनी   साधारण   हैं   उतनी   ही   गुणों   में अमृत   के   समान   हैं,   अनेक   कष्ट   साध्य   रोग   जैसे   कैंसर, कोलाइटिस,   हार्ट,   मोटापा,   अलसर,   ब्लड   क्लॉटिंग   रक्त के थक्के   जमने   में,   उच्च   रक्तचाप,   नींद   की   कमी,   पथरी,   मूत्र की   रुकावट   में   पत्तागोभी   बहुत   लाभकारी   हैं।   इसकी   सब्जी भी   घी   से   छौंककर   बनानी   चाहिए।   पत्तागोभी   को   करमकल्ला   के   नाम   से   भी   पुकारा   जाता   हैं।   इसका   रस, सलाद   और   सब्जी   सभी   गुणकारी   हैं।   रोगी   व्यक्ति   को नियमित   इसके   जूस   का   सेवन   करना   चाहिए.   और   अगर स्वस्थ   व्यक्ति   भी   इसका   सेवन  करता   है   तो   उसका   स्वास्थय नियमित   बना   रहता   है.


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म्यूच्यूअल फण्ड क्या है और हमारे लिए कैसे फायदेमंद है? Mutual Fund in Hindi

Mutual Fund Kya Hai (What is Mutual Fund in Hindi), आज के दौर में लगभग सभी लोग म्यूचुअल फण्ड का नाम सुने हैं परंतु ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जिन्हे म्यूच्यूअल फण्ड क्या है इस बारे में नहीं पता है | क्योकि इस प्रकार के financial terms में उनकी रूचि नहीं होती है और वो सोचते है की वे किसी झंझट में नहीं पड़ना चाहते है। जबकि कुछ ऐसी scheme होती है जिससे अच्छा profit कमाया जा सकता है। अगर mutual fund में सोच समझकर money investment किया जाये तो कम समय में लाखो रूपये earn कर सकते है।

अगर आप भी mutual fund के बारे में जानना चाहते है तो इस पोस्ट को पूरा जरूर पढ़े तभी आप जान पाएंगे की mutual fund क्या है? mutual fund कितने प्रकार के होते है , कौन से फण्ड में निवेश करें, इसमें investment कैसे करते है? mutual fund में invest करने पर क्या जोखिम है ?


Mutual Fund in Hindi

Mutual Fund क्या है?

बहुत सारे निवेशकों द्वारा जमा की गयी राशि(पैसे) को mutual fund कहते है और उस पैसा को एक fund में डाल दिया जाता है। और इस जमा राशि को fund manager द्वारा manage किया जाता है और fund manager अपनी skills का उपयोग करके उस fund में जमा पैसो से financial assets को खरीदने में या वित्तीय साधनो में निवेश करता है। तथा यह विकलप है वैसे निवेशकों के लिए जो बैंक और अन्य संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले ब्याज से संतुष्ट नहीं हैं, तथा लम्बी अवधि के लिए निवेशित रहने को तैयार हैं | लम्बी अवधि के लिए निवेश का सबसे अच्छा विकल्प म्यूचुअल फण्ड को माना जाता है |

म्यूचुअल फण्ड EQUITY तथा DEBT दोनों तरह की Securities में निवेशको की राशि निवेश करता है | निवेश के लिए विशिष्ट फण्ड मैनेजर्स नियुक्त किये जाते हैं जिनकी शेयर बाजार तथा DEBT पर अधययन काफी मजबूत होती है | वैसे निवेशक ( investors) जो Share market में सीधे निवेश नहीं कर पाते, या उनका जेब अनुमति नहीं देता, या समय का आभाव या तकनिकी दिक्कत निवेशकों के लिए परेशानी बने तो वैसे निवेशक जिनकी जानकारी शेयर बाजार में सिमित हो, वे म्यूचुअल फण्ड के माध्यम से निवेश कर सकते हैं |

Mutual funds में कई प्रकार से निवेश किया जाता है और invest में होने वाले risk , profit & loss और returns भी इसी पर depend करता है। Mutual funds में बाजार के अनुसार उतार चड़ाव होता है तथा इससे रकम निकालने को निवेशक स्वतंत्र होता है, Funds के scheme से निकाशी(withdraw) अत्यंत सरल होता है | अपने द्वारा निवेश किये गए राशि (रकम) की monitoring समय समय पर करते रहना चाहिए |

आज के समय में कोई भी व्यक्ति छोटी सी राशि से mutual fund मैं निवेश करना शुरू कर सकता है। mutual fund मैं minimum 500 रुपये से निवेश कर सकता है। Mutual fund में एक निवेशक जो कि बड़ा निवेश नहीं कर पाता, उस के पास छोटे छोटे Units में निवेश करने की सुविधा होती है। इसके अलावा Mutual Fund का सबसे बड़ा फायदा यह है की एक निवेशक जिसे बाज़ार की अधिक जानकारी नहीं है वह अपना निवेश की गई राशि विशेषज्ञों के हाथ में छोड़ देता है और इस fund को कहाँ, कैसे और कब निवेश करना है यह उन विशेषज्ञों(experts) पर निर्धारित होता हैं।

Mutual Fund में पैसे Invest कैसे करे?


Mutual Fund मैं निवेश करना आज के समय में बहुत ही सरल हो गया है। आप Mutual Fund में निवेश करना चाहते है तो online वेबसाइट से निवेश कर सकते है या आप किसी Agent या Company के जरिये Mutual Fund में निवेश कर सकते है। अगर आप इस क्षेत्र में नए है और आपको mutual fund के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है तो आपके लिए किसी expert के जरिये ही mutual fund में निवेश करना अच्छा विकल्प रहेगा ।

क्यों की experts इस field में बहुत समय से काम कर रहे होते है और उनको मार्केट की अच्छी knowledge होती है। इसलिए आपको Agent के जरिये निवेश करना चाहिए। वह आपके पैसे आपकी जरुरत के हिसाब से उन्ही Mutual Fund में लगाएगा जिस तरह का मुनाफा आप चाहते है। अगर आप कम risk वाले funds मैं निवेश करना चाहते है तो वह आपका पैसा उसी प्रकार की mutual fund scheme मैं निवेश करता है जिसमे risk कम होती है।

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Mutual Fund में लगाए पैसे कैसे काम करता है?


जब बहुत से निवेशक मिल कर एक Fund में निवेश (Invest) करते हैं तो उस fund को बराबर हिस्सों में बाँट दिया जाता है जिसे इकाई या Unit कहते हैं।
उदाहरण के लिये मान लीजिये कि कुछ दोस्त मिल कर एक एकड़ का Tree plant खरीदना चाहते हैं। एक एकड़ जमीन में 1000 पेड़ लगे हुए है जिसकी कीमत 10 लाख रुपये है। अब यदि इस फंड को 100 रु कि युनिट्स में बांटेंगे तो 10,000 यूनिट बनेंगे। निवेशक जितने चाहे उतने यूनिट अपनी निवेश क्षमता के अनुसार खरीद सकते हैं। यदि आपके पास केवल 1000 रुपये निवेश करने के लिए हैं तो आप 10 यूनिट खरीद सकते हैं। उसी अनुपात में आप भी उस निवेश (Tree plant) के मालिक हो जायेगे।

अब मान लीजिये की इस 10 लाख के निवेश की कीमत बढ़ कर एक महीने के बाद 12 लाख रूपये हो गयी। अब इस निवेश के अनुसार यूनिट की कीमत निकाली जायेगी तो 100 रुपये वाला यूनिट अब 120 रुपये का हो चुका है। जिस निवेशक ने एक हजार रुपये में 10 यूनिट खरीदे थे, 120 प्रति यूनिट के हिसाब से अब उसका निवेश (120X10) यानि 1200 रुपये हो जायेगा। इस प्रकार से बाजार में बड़ोतरी होने से निवेशक (investor) को फायदे होते है ।

Mutual Fund में Invest करने से पहले किन बातो का ध्यान रखना चाहिए

अगर आपने mutual fund में निवेश करने का मन बना लिया है और अपनी पूंजी का कुछ हिस्सा इसमें निवेश करना चाहते है तो सबसे पहले आपको कुछ बातो को जानना आवश्यक है।

  1. Mutual fund में निवेश करने से पहले आपको सही Mutual Fund scheme का चुनाव (selection) करना जरुरी है।
  2. इसके बाद अपनी जोखिम लेने की क्षमता का आकलन भी कर ले और Mutual funds की पिछली performance को check करे। इससे आपको एक idea जरूर मिल जायेगा की कोन सी स्कीम में risk काम और profit ज्यादा है।
  3. Mutual fund के investment में होने वाले खर्चे को भी एक बार निर्धारित (determine) कर ले और साथ ही Fund house और Fund manager के पिछले रिकॉर्ड को भी चेक करे।

Mutual Fund Investment के Advantages क्या है


  1. Mutual fund में इन्वेस्ट करने का सबसे बड़ा फायदा ये है की आप 500 रूपये की न्यूनतम राशि से इन्वेस्ट कर सकते है जो की एक छोटी रकम है शुरुवात करने के लिए मतलब अगर आपके पास ज्यादा बड़ा capital (पूंजी) नहीं है तब भी आप mutual fund में इन्वेस्ट करके लाभ उठा सकते है।

  2. Mutual fund में invest करने पर निवेशकों को इसकी देख-रेख नहीं करनी पड़ती है क्योकि इसको fund managers और experts के द्वारा मैनेज कर लिया जाता है और ये expert लम्बे समय से इस field में काम कर चुके होते है और मार्केट में होने वाले उतार चड़ाव पर अपनी नजर रखते है और ये expert अपनी skills और experience से सिर्फ ऐसी scheme में fund का पैसा निवेश करते है जहा पर ज्यादा से ज्यादा लाभ हो सके।

  3. Mutual funds को मैनेज करने वाला मैनेजर आपको scheme की पूरी जानकारी देता रहता है तथा और कहा इन्वेस्ट कर रहा है मार्केट में होने वाले बदलाव आदि से अगवत करता है जिससे इसमें पारदर्शिता(Clarity) बनी रहती है। और इसमें किसी भी प्रकार का अतिरिक्त(Extra) और hidden charge नहीं देना पड़ता है।

  4. Mutual fund में कई प्रकार की scheme रहती है और मार्केट में भी परिवर्तन होती रहती है जिसकी बजह से कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छानुसार और अपनी क्षमता के अनुसार Invest कर सकता है।

  5. भारत में Mutual Funds को SABI (Securities and Exchange Board of India) के द्वारा नियमित रूप से नियंत्रित (control) किया जाता है और ये निवेशकर्ताओं (Investors) के हितो का पूरा ध्यान रखते है।

Mutual Fund Investment के Disadvantages क्या है


  1. Mutual fund के पैसे को बिभिन्न प्रकार के मार्केट में invest किया जाता है और कभी-कभी इस मार्केट की वैल्यू(Value) में आये उतार चढ़ाव की बजह से आपको loss भी सहना पड़ सकता है।

  2. Mutual फंड में कई लोग एक साथ invest करते है और अगर बहुत बढ़ा मुनाफा होता भी है तो उस profit को कई लोगो में बाँट दिया जाता है जिसकी बजह से profit का कुछ हिस्सा ही मिल पता है जिससे ज्यादा लाभ नहीं मिल पता है।

  3. Mutual fund के पैसे को कहा और कब इन्वेस्ट करना है इस पर investors का control नहीं होता है क्योकि mutual fund को fund manager द्वारा मैनेज किया जाता है। इसलिए इन्हे नियंत्रित करने का कोई भी विकल्प आपके पास नहीं होता है।

  4. यदि आप अपने Mutual fund के निवेश रकम को समय से पहले तोड़ते है यानि निकाशी (withdraw) करते है तो आपको उस समय बाजार की चल रही वर्तमान राशि प्राप्त होती है ।

Conclusion

यदि आप Mutual Fund क्या होता है (What is Mutual Fund in Hindi) इस बारे में जान चुके है । और इसमें invest करने की विचार बना रहे है तो आपको बता दू की सबसे पहले आप जहा भी अपना पैसा invest करें उसके बारे में अच्छी तरह से जांच पड़ताल जरूर कर लें और उसके बाद ही अपना पैसा Mutual fund में निवेश करें । क्योंकि जरा सी भूल से आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

फिर भी mutual fund में invest करना एक अच्छा कदम हो सकता है । अगर आप सोच समझकर इसमें इन्वेस्ट करें तो आप भी लाभ उठा सकते है। यदि फिर भी mutual fund क्या है इससे जुडी कोई आपका सवाल या सुझाव है तो हमे कमेंट बॉक्स पर जरूर लिखे ।
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50+ आसान नुक्से अस्थमा का इलाज़ कैसे करे (घरेलु एवं आयुर्वेद उपचार)

Asthma Ka ilaj Kaise Kare, प्रकृति में हर रोग से लड़ने की क्षमता है और उसे जड़ से नष्ट करने की भी उसमें अदभुत शक्ति है ! ASTHAMA ( श्वास रोग ) रोग से छुटकारा पाना चाहते हैं तो जड़ी-बूटियों से इसका उपचार करना चाहिए !

अस्थमा (ASTHMA) का इलाज़ कैसे करे

अस्थमा क्या है | दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे ?

दमा (अस्थमा) आज के प्रदूषित माहौल में किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है ! दमा फेफडों का रोग है फेफडों में वायु का संचार करने वाली अनेक नलिकाओं का जाल-सा बिछा है, जो छोटी-छोटी मांशपेशियां में जब अकड़न, तनाव, आक्षेप, संकुचन उत्पन्न होता है तब रोगी को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है ! इसे श्वास रोग भी कहा जाता है !


Asthma Symptoms | अस्थमा के लक्षण

दमा अधिकांशतः प्रौढ़ स्त्री-पुरुषों को होता है ! कुछ व्यक्तियों को यह रोग माता-पिता तथा दादा-दादी से भी मिलता है ! कभी-कभी नाक के अंदर फोड़ा बनने, उपदश, ब्रोंकाइटिस या पुराना डिंबकोश-रोग से भी दमा की उत्पति हो जाती है !

धूल के कण, धुआँ तथा स्नायु विकारों के कारण भी दमा की शिकायत हो सकता है ! बच्चों को दमा उस स्थिति में होता है, जब उनके फेफड़े या श्वास प्रणाली में कफ जमकर सुख जाता है ! यह कफ अवरोध पैदा करता है, जिसमे बच्चे को साँस लेने में कठिनाई होती है, दम फूलने लगता है और बच्चा हाँफ़ने लगता है !

दमा की खाँसी में स्वास लेने तथा निकालने में कष्ट होता है ! यह तकलीफ कम और अधिक होती रहती है ! जिस रोगी को बलगम नहीं निकलता है, उसे सूखे दमे की शिकायत होती है ! दमे का जब दौरा पड़ता है तो गले से सांय-सांय की आवाज़ निकलती है !


कुछ बलगम निकलने पर ही रोगी को आराम मिलता है ! स्वास कण्ठ बढ़ने पर रोगी का चेहरा पीला पड़ जाता है ! वह पसीने से तरबतर हो जाता है ! शरद ऋतु में दमा का रोगी अत्यधिक परेशान रहता है !


 श्वास का प्रमुख लक्षण जुकाम है। पुराने जुकाम का प्रभाव नाम , गला, फेफ़ड़ा, आमाशय और आँतो की
 श्लैश्किम झीलियो पर पड़ता है। ये सभी रोग दुग्धोपचार से ठीक हो जाते है। इसमें केवल दुग्धपान ही करना
 होता है। दूध के सेवन से जब शरीर में नया खून बनने लगता है तब शरीर की इन्द्रियां सशक्त होने लगती है
 और स्वयं ही रोग कम होने लगता है। इस प्रकार तमक श्वास, जठर श्वास, क्षीण श्वास आदि रोग लगभग
 एक माह के दुग्धपाचर से ठीक हो जाते है। दूध उपयोग पहले रोग के लक्षणों को बढ़ाता जरूर है लेकिन इससे
 घबराना नहीं चाहिए। प्रतिदिन दूध पिने पर सभी रोग शांत हो जाते है।


Home Remedies for Asthma | अस्थमा का घरेलू उपचार

दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे जाने दमा का घरेलु अपचार क्या है
  • अनारदाना सूखा 100 ग्राम , सौंठ , काली मिर्च , पीपल , दालचीनी , तेजपत्ता , इलायची 50 - 50 ग्राम लेकर चूर्ण बना ले और इसमें समभाग खांड मिलाकर दिन में दो बार शहद के साथ 2 - 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से खाँसी , श्वास , पीनस, ह्रदय रोग आदि दूर होते है | यह उत्तम , दीपन , पाचन और रेचक है | 

  • हरड़ और सौंठ समान भाग लेकर चूर्ण बनाए | इसे गुनगुने जल के साथ 2 - 5 ग्राम की मात्रा में प्रातः - सायं सेवन करने से श्वास , कास और कामला का नाश होता है |

  • गाय के दूध में काली मिर्च चूर्ण को पकाकर मिलाने से श्वास कास में लाभ होता है |

  • अगर खाँसी बार - बार उठती है , भोजन निगलने में कष्ट होता है तो दिन में 2 - 3 बार काली मिर्च के फाँट से कुल्ले करे |

  • कष्टदायक श्वास कास में काली मिर्च चूर्ण 2 भाग, पीपल चूर्ण दो भाग , अनार की छाल चार भाग , जौखार एक भाग चूर्ण बनाकर 8 भाग गुड़ में मिलाकर एक - एक ग्राम की गोलियां बनाकर दिन में तीन बार सेवन करने से लाभ होता |

  • श्वास रोग में मूली का रस पिए | सूखी मूली का क्वाथ 50 से 100 ग्राम तक एक - एक घंटे पर पिलाए |

  • हल्दी को रेत में भून - पीसकर चूर्ण बना ले और प्रतिदिन एक चम्मच चूर्ण गरम पानी से खाए | दमा में इससे विशेष लाभ होता है |

  • लौंग चार , काली मिर्च , चार तथा तुलसी के पत्ते चार - इन सब पदार्थो को मिलाकर चटनी की तरह पीसे और नित्य इस तरह का चटनी का सेवन करे |

  • हल्दी , काली मिर्च , किशमिस , पीपल , रासना तथा कचूर - सब 5 - 5 ग्राम लेकर पीस ले | इसमें से चार माशा चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करे | दमा (श्वास) रोग में विशेष लाभ होता है |

  • गाय का गुनगुना घी नाक में सुड़कने से नासा - शोष मिट जाता है | नाक की दाह , श्वास - प्रश्वास का कष्ट दूर हो जाता है और बार - बार छींके नहीं आती है |

  • हल्दी पाँच ग्राम की फंकी लेकर गुनगुने पानी के पाँच घूँट भर लेने से ही दमा नष्ट हो जाता है | 

  • जो रोगी पिप्पली तथा सेंधा नमक के मिश्रित चूर्ण को अदरक के रस के साथ सोने के समय सेवन करता है , वह सात दिन के अंदर ही श्वास रोग से मुक्त हो जाता है |

  • तेजपत्ता और पीपल को 2 - 2 ग्राम की मात्रा में अदरक के मुरब्बे की चाशनी में बुरक कर चाटने से दमा और श्वास नली का उपद्रव मिट जाता है | 

  • श्वास रोग तथा कास में सत्यानाशी के मूल का चूर्ण आधा से एक ग्राम ठंडा जल या दूध के साथ प्रातः - सायं पिलाने से कफ बाहर निकल जाता है या इसका पीला दूध 4 - 5 बूंद बतासे में डालकर खाने से लाभ होता है |


Asthma Treatment in Ayurveda | आयुर्वेद में अस्थमा का इलाज

अस्थमा (ASTHMA) का इलाज़ कैसे करे


दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे जाने आयुर्वेद में अस्थमा का इलाज क्या है ?
  • नीम के बीजों का शुद्ध तेल आस्थमा (श्वास रोग ) का जड़ से नाश कर देता है | दिन में 50-60 बूंद यदि शरीर में पहुँच जाए तो वर्षो पुराना श्वास रोग सप्ताहों में ही नष्ट हो जाता है | पान पर डालकर नीम का 10 बूंद शुद्ध तेल का सेवन करें | ऐसे पान दिन भर में 5-6 चबाकर निगल जाए | मात्र 3 माह के बाद ही दमा के रोगी को यह लगने लगेगा, कि जीवन में उसे दमा हुआ ही नहीं है |

  • शलजम का रस एक कप, गाजर का रस एक कप तथा पत्ता गोभी का रस एक कप-सब को मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करे |

  • अनार के फूल 10 ग्राम , कत्था 10 ग्राम और कपूर एक ग्राम - तीनों को घोटकर चने के बराबर गोलियाँ बना ले और एक - एक गोली दिन में चार बार चूसें | इससे दमा (श्वास रोग ) का नाश होता है |

  • करील की लकड़ी की भस्म एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन पान के साथ खाने से 15 -20 दिन के प्रयोग से ही दमा रोग दूर हो जाता है |

  • धतूरे का एक बीज 8 दिनों तक प्रातःकाल पानी से निगल लें | दूसरे सप्ताह 2-2 बीज निगले | इसी प्रकार प्रत्येक सप्ताह एक - एक बीज बढ़ाते हुए पाँचवे सप्ताह में 5 - 5 बीज प्रतिदिन निगले | पुराने से पुराना दमा इस प्रयोग से नष्ट हो जाता है |

  • रीठा के फल को पीसकर उसकी सूँघनी सुंघने से दमा में तुरंत लाभ होता है |

  •  सहजन की जड़ का रस और अदरक का रस समभाग मिलाकर 10 - 15 ग्राम की मात्रा नियमित प्रातः - सायं पिलाने से श्वास रोग मिटता है |

  • पिप्पली के एक ग्राम चूर्ण के साथ समभाग त्रिफला मिलाकर दिन में तीन बार सुबह खाली पेट व दोपहर रात्रि को भोजन से आधा घंटा पहले शहद मिलाकर चाटने से श्वास - कफ, ज्वर , पीनस , हिक्का आदि का नाश होता है |

  • मुनक्का, वंशलोचन, मिश्री व लाख समभाग लेकर सबको पीसकर 3 ग्राम चूर्ण एक ग्राम घी और चार ग्राम शहद में मिलाकर दिन में तीन बार नियमित 10-15 दिन लेने से लाभ होता है इससे सूखी खाँसी मिट जाती है |

  • पीपल वृक्ष के सूखे फलों को पीसकर 2 - 3 ग्राम की मात्रा में 14 दिन तक जल के साथ फंकी सुबह - शाम लेने से श्वास रोग मिटता है |

  • पीपल की छाल और पके फल का चूर्ण समभाग मिलाकर पीस ले | आधा चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करने से दमें में लाभ होता है |

  • नीम के बीजों का शुद्ध तेल 30 - 60 बूंद तक पान में रखकर खाने से दमे में लाभ होता है |

  • मुलेठी का 20-25 ग्राम क्वाथ सुबह-शाम पिने से श्वास नलिका साफ़ हो जाती है |

  • शक्कर और एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार लेने से दमा और खांसी दूर होती है|

  • श्वास रोग में भुई आंवला की जड़ 10 ग्राम की मात्रा में जल में पीसकर उसमे एक चम्मच मिलाकर पिलाना चाहिए और इसका नस्य भी देना चाहिए |

  • गेंदों के बीजो का चूर्ण बनाकर उसमे समभाग मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में पानी के साथ 2 - 3 बार सेवन करने से खांसी और दमा में लाभ होता है , लेकिन जल से परहेज करना चाहिए |

  • जुकाम, नासा रोग तथा विशेष रूप से नासा रुध्र अवरोध की दशा में कसौंदी पत्ते के स्वरस की एक - दो बूंदो को नाक में टपकाने से आराम मिलता है |

  • श्वास रोग में अनानास फल के रस में छोटी कटेरी की जड़ , आमला और जीरा समभाग चूर्ण मिलाकर तथा शहद के साथ सेवन करे |

  • अपामार्ग की जड़ में बलगमी खाँसी और दमा को नाश करने का चमत्कारिक गुण है | इसके 8 - 10 सूखे पतों को हुक्के में रखकर पिने से दमा में लाभ होता है |

  • श्वास रोग की तीव्रता में अपामार्ग की जड़ का चूर्ण 6 ग्राम और सात काली मिर्च का चूर्ण - दोनों को सुबह - शाम ताजे जल के साथ लेने से बहुत लाभ होता है |

  • अरलू की छाल के चूर्ण को एक ग्राम चूर्ण को थोड़ा-थोड़ा दूध के साथ खिलाने से खाँसी और श्वास रोग मिटता है |

  • बेल मूल, अडूसा पत्र तथा नागफनी, थूहर के पके सूखे फल 4 - 4 भाग, सोंठ, काली मिर्च और पिपली एक - एक भाग लेकर उसको कूटकर रखे | उसमे से 20 ग्राम आधा किलो जल में अष्टमांश कर प्रातः सायं शहद के साथ सेवन कराने से शीघ्र लाभ होता है | श्वास, क्षय , वमन आदि में लाभ होता है |

  • अमलतास की फल - मज्जा का 40 - 60 ग्राम क्वाथ पिलाने से मृदु विरेचन होकर श्वास की रुकावट दूर होती है |अलसी को धीमी आँच पर तवे पर भून ले | 

  • अलसी जब भून जाए तब बारीक़ चूर्ण बना ले और इसमें समभाग मिश्री मिला ले | जुकाम, श्वास रोग में 5 - 5 ग्राम तक ठंडा जल के साथ दोनों समय देने से आराम होता है | खाँसी का भी दमन होता है |

  • अलसी के बीजो को भूनकर शहद के साथ चटाने से श्वास एवं खाँसी में आराम मिलता है |

  • 5 ग्राम अलसी के बीज, 50 ग्राम पानी में भिगोकर रखे और 12 घंटे बाद जल पी ले | प्रातः काल भिगोया हुआ सायंकाल और शाम को भिगोया हुआ सुबह को पी ले | इस जल के सेवन से श्वास ग्रस्त रोगी को बहुत बल मिलता है |

  • 5 ग्राम अलसी के बीजो को कूटकर छानकर जल में उबाले | इसमें 20 ग्राम मिश्री मिलाकर यदि शीतकाल हो तो मिश्री के स्थान पर शहद मिलाए | इस पेय के प्रातः - सायं सेवन करने से भी कास-श्वास में लाभ होता है |

  • केवल अनार के फल के छिलके को मुँह में रखकर चूसने से भी कास श्वास रोग में लाभ होता है |

  • अनार का छिलका 40 ग्राम तथा गुड़ 80 ग्राम की चाशनी बनाकर उसमे सबका महीन चूर्ण मिलाकर 500-500 मिली ग्राम की गोली बनाकर 2 - 2 गोली दिन में 3 बार गर्म जल से सेवन करे | इसमें काली मिर्च 10 ग्राम मिला लेने से और भी उत्तम लाभ होता है |

  • आक के फूलों की लौंग 50 ग्राम और काली मिर्च 6 ग्राम - दोनों को खूब बारीक़ पीस कर मटर के बराबर गोलियां बना ले | सुबह एक या दो गोली गर्म पानी के साथ सेवन करने से श्वास का वेग रुक जाता है |

  • आक के पत्तो पर, जो सफेद क्षार-सा छाया रहता है, उसे 5 ग्राम से 10 ग्राम तक गुड़ में लपेटकर गोली बना ले और उसे निगल जाए | इससे कफ छूटकर कास - श्वास रोग में लाभ होता है |

  • पुराने से पुराने आक की जड़ को छाया में सूखा ले और निर्जन स्थान में जलाकर राख कर ले | इसमें से कोयला अलग कर ले | अब 1 - 2 ग्राम राख शहद या पान में रखकर खाने से कास श्वास में लाभ होता है |

  • आक के एक पत्ते पर जल के साथ महीन पिसा हुआ कत्था और चुना लगाकर दूसरे पत्ते पर गाय का घी चुपड़कर दोनों पत्तो को बराबर जोड़ ले | इस प्रकार पत्तो को तैयार कर मटकी में रखकर जला ले | यह कष्टदायक श्वास में अत्यंत ही लाभदायक है | इसे छानकर काँच की शीशी में रख ले | 10 - 30 ग्राम तक घी, गेहूँ की रोटी या चावल में डालकर खाने से कफ प्रकृति के पुरुषो में शक्ति को यह पैदा करता है तथा समस्त कफज व्यक्तियों को एवं आंत्रकृमि को नष्ट करता है |

  • अडूसा, हल्दी, धनिया, गिलोय, पीपल, सौंठ तथा रिंगणी के 10 - 20 ग्राम क्वाथ में एक ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पीने से सम्पूर्ण श्वास समूल रूप से नष्ट हो जाते है |


[ निष्कर्ष ]

दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे इस लेख में हमने अस्थमा से जुड़े घरेलू उपचार एवं आयुर्वेद उपचार दोनों ही बताया है उम्मीद करता हूँ की इस आर्टिकल से आपको काफी लाभ होगा अगर आपका कोई सवाल या कोई सुझाव है तो हमें कमेंट बॉक्स पर जरूर लिखे |

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