50+ आसान नुक्से अस्थमा का इलाज़ कैसे करे (घरेलु एवं आयुर्वेद उपचार)

50+ आसान नुक्से अस्थमा का इलाज़ कैसे करे (घरेलु एवं आयुर्वेद उपचार)

दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे प्रकृति में हर रोग से लड़ने की क्षमता है और उसे जड़ से नष्ट करने की भी उसमें अदभुत शक्ति है ! ASTHAMA ( श्वास रोग ) रोग से छुटकारा पाना चाहते हैं तो जड़ी-बूटियों से इसका उपचार करना चाहिए !

अस्थमा (ASTHMA) का इलाज़ कैसे करे | Asthma Treatment in Hindi

अस्थमा क्या है | दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे ?

दमा (अस्थमा) आज के प्रदूषित माहौल में किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है ! दमा फेफडों का रोग है फेफडों में वायु का संचार करने वाली अनेक नलिकाओं का जाल-सा बिछा है, जो छोटी-छोटी मांशपेशियां में जब अकड़न, तनाव, आक्षेप, संकुचन उत्पन्न होता है तब रोगी को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है ! इसे श्वास रोग भी कहा जाता है !


Asthma Symptoms | अस्थमा के लक्षण

दमा अधिकांशतः प्रौढ़ स्त्री-पुरुषों को होता है ! कुछ व्यक्तियों को यह रोग माता-पिता तथा दादा-दादी से भी मिलता है ! कभी-कभी नाक के अंदर फोड़ा बनने, उपदश, ब्रोंकाइटिस या पुराना डिंबकोश-रोग से भी दमा की उत्पति हो जाती है !

धूल के कण, धुआँ तथा स्नायु विकारों के कारण भी दमा की शिकायत हो सकता है ! बच्चों को दमा उस स्थिति में होता है, जब उनके फेफड़े या श्वास प्रणाली में कफ जमकर सुख जाता है ! यह कफ अवरोध पैदा करता है, जिसमे बच्चे को साँस लेने में कठिनाई होती है, दम फूलने लगता है और बच्चा हाँफ़ने लगता है !

दमा की खाँसी में स्वास लेने तथा निकालने में कष्ट होता है ! यह तकलीफ कम और अधिक होती रहती है ! जिस रोगी को बलगम नहीं निकलता है, उसे सूखे दमे की शिकायत होती है ! दमे का जब दौरा पड़ता है तो गले से सांय-सांय की आवाज़ निकलती है !


कुछ बलगम निकलने पर ही रोगी को आराम मिलता है ! स्वास कण्ठ बढ़ने पर रोगी का चेहरा पीला पड़ जाता है ! वह पसीने से तरबतर हो जाता है ! शरद ऋतु में दमा का रोगी अत्यधिक परेशान रहता है !


 श्वास का प्रमुख लक्षण जुकाम है। पुराने जुकाम का प्रभाव नाम , गला, फेफ़ड़ा, आमाशय और आँतो की
 श्लैश्किम झीलियो पर पड़ता है। ये सभी रोग दुग्धोपचार से ठीक हो जाते है। इसमें केवल दुग्धपान ही करना
 होता है। दूध के सेवन से जब शरीर में नया खून बनने लगता है तब शरीर की इन्द्रियां सशक्त होने लगती है
 और स्वयं ही रोग कम होने लगता है। इस प्रकार तमक श्वास, जठर श्वास, क्षीण श्वास आदि रोग लगभग
 एक माह के दुग्धपाचर से ठीक हो जाते है। दूध उपयोग पहले रोग के लक्षणों को बढ़ाता जरूर है लेकिन इससे
 घबराना नहीं चाहिए। प्रतिदिन दूध पिने पर सभी रोग शांत हो जाते है।


Home Remedies for Asthma | अस्थमा का घरेलू उपचार

दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे जाने दमा का घरेलु अपचार क्या है
  • अनारदाना सूखा 100 ग्राम , सौंठ , काली मिर्च , पीपल , दालचीनी , तेजपत्ता , इलायची 50 - 50 ग्राम लेकर चूर्ण बना ले और इसमें समभाग खांड मिलाकर दिन में दो बार शहद के साथ 2 - 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से खाँसी , श्वास , पीनस, ह्रदय रोग आदि दूर होते है | यह उत्तम , दीपन , पाचन और रेचक है | 

  • हरड़ और सौंठ समान भाग लेकर चूर्ण बनाए | इसे गुनगुने जल के साथ 2 - 5 ग्राम की मात्रा में प्रातः - सायं सेवन करने से श्वास , कास और कामला का नाश होता है |

  • गाय के दूध में काली मिर्च चूर्ण को पकाकर मिलाने से श्वास कास में लाभ होता है |

  • अगर खाँसी बार - बार उठती है , भोजन निगलने में कष्ट होता है तो दिन में 2 - 3 बार काली मिर्च के फाँट से कुल्ले करे |

  • कष्टदायक श्वास कास में काली मिर्च चूर्ण 2 भाग, पीपल चूर्ण दो भाग , अनार की छाल चार भाग , जौखार एक भाग चूर्ण बनाकर 8 भाग गुड़ में मिलाकर एक - एक ग्राम की गोलियां बनाकर दिन में तीन बार सेवन करने से लाभ होता |

  • श्वास रोग में मूली का रस पिए | सूखी मूली का क्वाथ 50 से 100 ग्राम तक एक - एक घंटे पर पिलाए |

  • हल्दी को रेत में भून - पीसकर चूर्ण बना ले और प्रतिदिन एक चम्मच चूर्ण गरम पानी से खाए | दमा में इससे विशेष लाभ होता है |

  • लौंग चार , काली मिर्च , चार तथा तुलसी के पत्ते चार - इन सब पदार्थो को मिलाकर चटनी की तरह पीसे और नित्य इस तरह का चटनी का सेवन करे |

  • हल्दी , काली मिर्च , किशमिस , पीपल , रासना तथा कचूर - सब 5 - 5 ग्राम लेकर पीस ले | इसमें से चार माशा चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करे | दमा (श्वास) रोग में विशेष लाभ होता है |

  • गाय का गुनगुना घी नाक में सुड़कने से नासा - शोष मिट जाता है | नाक की दाह , श्वास - प्रश्वास का कष्ट दूर हो जाता है और बार - बार छींके नहीं आती है |

  • हल्दी पाँच ग्राम की फंकी लेकर गुनगुने पानी के पाँच घूँट भर लेने से ही दमा नष्ट हो जाता है | 

  • जो रोगी पिप्पली तथा सेंधा नमक के मिश्रित चूर्ण को अदरक के रस के साथ सोने के समय सेवन करता है , वह सात दिन के अंदर ही श्वास रोग से मुक्त हो जाता है |

  • तेजपत्ता और पीपल को 2 - 2 ग्राम की मात्रा में अदरक के मुरब्बे की चाशनी में बुरक कर चाटने से दमा और श्वास नली का उपद्रव मिट जाता है | 

  • श्वास रोग तथा कास में सत्यानाशी के मूल का चूर्ण आधा से एक ग्राम ठंडा जल या दूध के साथ प्रातः - सायं पिलाने से कफ बाहर निकल जाता है या इसका पीला दूध 4 - 5 बूंद बतासे में डालकर खाने से लाभ होता है |


Asthma Treatment in Ayurveda | आयुर्वेद में अस्थमा का इलाज

अस्थमा (ASTHMA) का इलाज़ कैसे करे | Asthma Treatment in Hindi



दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे जाने आयुर्वेद में अस्थमा का इलाज क्या है ?
  • नीम के बीजों का शुद्ध तेल आस्थमा (श्वास रोग ) का जड़ से नाश कर देता है | दिन में 50-60 बूंद यदि शरीर में पहुँच जाए तो वर्षो पुराना श्वास रोग सप्ताहों में ही नष्ट हो जाता है | पान पर डालकर नीम का 10 बूंद शुद्ध तेल का सेवन करें | ऐसे पान दिन भर में 5-6 चबाकर निगल जाए | मात्र 3 माह के बाद ही दमा के रोगी को यह लगने लगेगा, कि जीवन में उसे दमा हुआ ही नहीं है |

  • शलजम का रस एक कप, गाजर का रस एक कप तथा पत्ता गोभी का रस एक कप-सब को मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करे |

  • अनार के फूल 10 ग्राम , कत्था 10 ग्राम और कपूर एक ग्राम - तीनों को घोटकर चने के बराबर गोलियाँ बना ले और एक - एक गोली दिन में चार बार चूसें | इससे दमा (श्वास रोग ) का नाश होता है |

  • करील की लकड़ी की भस्म एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन पान के साथ खाने से 15 -20 दिन के प्रयोग से ही दमा रोग दूर हो जाता है |

  • धतूरे का एक बीज 8 दिनों तक प्रातःकाल पानी से निगल लें | दूसरे सप्ताह 2-2 बीज निगले | इसी प्रकार प्रत्येक सप्ताह एक - एक बीज बढ़ाते हुए पाँचवे सप्ताह में 5 - 5 बीज प्रतिदिन निगले | पुराने से पुराना दमा इस प्रयोग से नष्ट हो जाता है |

  • रीठा के फल को पीसकर उसकी सूँघनी सुंघने से दमा में तुरंत लाभ होता है |

  •  सहजन की जड़ का रस और अदरक का रस समभाग मिलाकर 10 - 15 ग्राम की मात्रा नियमित प्रातः - सायं पिलाने से श्वास रोग मिटता है |

  • पिप्पली के एक ग्राम चूर्ण के साथ समभाग त्रिफला मिलाकर दिन में तीन बार सुबह खाली पेट व दोपहर रात्रि को भोजन से आधा घंटा पहले शहद मिलाकर चाटने से श्वास - कफ, ज्वर , पीनस , हिक्का आदि का नाश होता है |

  • मुनक्का, वंशलोचन, मिश्री व लाख समभाग लेकर सबको पीसकर 3 ग्राम चूर्ण एक ग्राम घी और चार ग्राम शहद में मिलाकर दिन में तीन बार नियमित 10-15 दिन लेने से लाभ होता है इससे सूखी खाँसी मिट जाती है |

  • पीपल वृक्ष के सूखे फलों को पीसकर 2 - 3 ग्राम की मात्रा में 14 दिन तक जल के साथ फंकी सुबह - शाम लेने से श्वास रोग मिटता है |

  • पीपल की छाल और पके फल का चूर्ण समभाग मिलाकर पीस ले | आधा चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करने से दमें में लाभ होता है |

  • नीम के बीजों का शुद्ध तेल 30 - 60 बूंद तक पान में रखकर खाने से दमे में लाभ होता है |

  • मुलेठी का 20-25 ग्राम क्वाथ सुबह-शाम पिने से श्वास नलिका साफ़ हो जाती है |

  • शक्कर और एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार लेने से दमा और खांसी दूर होती है|

  • श्वास रोग में भुई आंवला की जड़ 10 ग्राम की मात्रा में जल में पीसकर उसमे एक चम्मच मिलाकर पिलाना चाहिए और इसका नस्य भी देना चाहिए |

  • गेंदों के बीजो का चूर्ण बनाकर उसमे समभाग मिश्री मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में पानी के साथ 2 - 3 बार सेवन करने से खांसी और दमा में लाभ होता है , लेकिन जल से परहेज करना चाहिए |

  • जुकाम, नासा रोग तथा विशेष रूप से नासा रुध्र अवरोध की दशा में कसौंदी पत्ते के स्वरस की एक - दो बूंदो को नाक में टपकाने से आराम मिलता है |

  • श्वास रोग में अनानास फल के रस में छोटी कटेरी की जड़ , आमला और जीरा समभाग चूर्ण मिलाकर तथा शहद के साथ सेवन करे |

  • अपामार्ग की जड़ में बलगमी खाँसी और दमा को नाश करने का चमत्कारिक गुण है | इसके 8 - 10 सूखे पतों को हुक्के में रखकर पिने से दमा में लाभ होता है |

  • श्वास रोग की तीव्रता में अपामार्ग की जड़ का चूर्ण 6 ग्राम और सात काली मिर्च का चूर्ण - दोनों को सुबह - शाम ताजे जल के साथ लेने से बहुत लाभ होता है |

  • अरलू की छाल के चूर्ण को एक ग्राम चूर्ण को थोड़ा-थोड़ा दूध के साथ खिलाने से खाँसी और श्वास रोग मिटता है |

  • बेल मूल, अडूसा पत्र तथा नागफनी, थूहर के पके सूखे फल 4 - 4 भाग, सोंठ, काली मिर्च और पिपली एक - एक भाग लेकर उसको कूटकर रखे | उसमे से 20 ग्राम आधा किलो जल में अष्टमांश कर प्रातः सायं शहद के साथ सेवन कराने से शीघ्र लाभ होता है | श्वास, क्षय , वमन आदि में लाभ होता है |

  • अमलतास की फल - मज्जा का 40 - 60 ग्राम क्वाथ पिलाने से मृदु विरेचन होकर श्वास की रुकावट दूर होती है |अलसी को धीमी आँच पर तवे पर भून ले | 

  • अलसी जब भून जाए तब बारीक़ चूर्ण बना ले और इसमें समभाग मिश्री मिला ले | जुकाम, श्वास रोग में 5 - 5 ग्राम तक ठंडा जल के साथ दोनों समय देने से आराम होता है | खाँसी का भी दमन होता है |

  • अलसी के बीजो को भूनकर शहद के साथ चटाने से श्वास एवं खाँसी में आराम मिलता है |

  • 5 ग्राम अलसी के बीज, 50 ग्राम पानी में भिगोकर रखे और 12 घंटे बाद जल पी ले | प्रातः काल भिगोया हुआ सायंकाल और शाम को भिगोया हुआ सुबह को पी ले | इस जल के सेवन से श्वास ग्रस्त रोगी को बहुत बल मिलता है |

  • 5 ग्राम अलसी के बीजो को कूटकर छानकर जल में उबाले | इसमें 20 ग्राम मिश्री मिलाकर यदि शीतकाल हो तो मिश्री के स्थान पर शहद मिलाए | इस पेय के प्रातः - सायं सेवन करने से भी कास-श्वास में लाभ होता है |

  • केवल अनार के फल के छिलके को मुँह में रखकर चूसने से भी कास श्वास रोग में लाभ होता है |

  • अनार का छिलका 40 ग्राम तथा गुड़ 80 ग्राम की चाशनी बनाकर उसमे सबका महीन चूर्ण मिलाकर 500-500 मिली ग्राम की गोली बनाकर 2 - 2 गोली दिन में 3 बार गर्म जल से सेवन करे | इसमें काली मिर्च 10 ग्राम मिला लेने से और भी उत्तम लाभ होता है |

  • आक के फूलों की लौंग 50 ग्राम और काली मिर्च 6 ग्राम - दोनों को खूब बारीक़ पीस कर मटर के बराबर गोलियां बना ले | सुबह एक या दो गोली गर्म पानी के साथ सेवन करने से श्वास का वेग रुक जाता है |

  • आक के पत्तो पर, जो सफेद क्षार-सा छाया रहता है, उसे 5 ग्राम से 10 ग्राम तक गुड़ में लपेटकर गोली बना ले और उसे निगल जाए | इससे कफ छूटकर कास - श्वास रोग में लाभ होता है |

  • पुराने से पुराने आक की जड़ को छाया में सूखा ले और निर्जन स्थान में जलाकर राख कर ले | इसमें से कोयला अलग कर ले | अब 1 - 2 ग्राम राख शहद या पान में रखकर खाने से कास श्वास में लाभ होता है |

  • आक के एक पत्ते पर जल के साथ महीन पिसा हुआ कत्था और चुना लगाकर दूसरे पत्ते पर गाय का घी चुपड़कर दोनों पत्तो को बराबर जोड़ ले | इस प्रकार पत्तो को तैयार कर मटकी में रखकर जला ले | यह कष्टदायक श्वास में अत्यंत ही लाभदायक है | इसे छानकर काँच की शीशी में रख ले | 10 - 30 ग्राम तक घी, गेहूँ की रोटी या चावल में डालकर खाने से कफ प्रकृति के पुरुषो में शक्ति को यह पैदा करता है तथा समस्त कफज व्यक्तियों को एवं आंत्रकृमि को नष्ट करता है |

  • अडूसा, हल्दी, धनिया, गिलोय, पीपल, सौंठ तथा रिंगणी के 10 - 20 ग्राम क्वाथ में एक ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पीने से सम्पूर्ण श्वास समूल रूप से नष्ट हो जाते है |


[ निष्कर्ष ]

दमा (अस्थमा) का इलाज़ कैसे करे इस लेख में हमने अस्थमा से जुड़े घरेलू उपचार एवं आयुर्वेद उपचार दोनों ही बताया है उम्मीद करता हूँ की इस आर्टिकल से आपको काफी लाभ होगा अगर आपका कोई सवाल या कोई सुझाव है तो हमें कमेंट बॉक्स पर जरूर लिखे |

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